Open Letter: Freedom of Expression Must Not Become a License for Hatred | By • Nikhil Pattani
असहमति का अधिकार बनाम नफ़रत फैलाने की ज़िम्मेदारी हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर प्रसाद वेदपाठक द्वारा जैन साधुओं के लिए बनाई गई सफेद पट्टी (White Pathway) को लेकर कई वीडियो और टिप्पणियाँ सामने आई हैं। इन वीडियो में इस व्यवस्था पर सवाल उठाए गए और कुछ पोस्टों में इसे "Jain Jihad" जैसे शब्दों से भी जोड़ा गया, जिस पर व्यापक आपत्ति और आलोचना हुई। बाद में स्वयं उन्होंने स्पष्टीकरण भी जारी किया कि उनका उद्देश्य जैन धर्म पर हमला करना नहीं था। तथ्य यह है कि जैन साधु-साध्वियाँ परंपरागत रूप से नंगे पैर विहार करते हैं। भीषण गर्मी में सड़क या मार्ग का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है, इसलिए कई स्थानों पर अस्थायी रूप से सफेद कोटिंग या सफेद पट्टी का उपयोग सतह को अपेक्षाकृत ठंडा रखने के लिए किया जाता है। यह व्यवस्था किसी राजनीतिक, सांप्रदायिक या विस्तारवादी उद्देश्य से नहीं, बल्कि धार्मिक आचरण और सुविधा से जुड़ी मानी जाती है। हम सभी को प्रश्न पूछने, सहमति या असहमति व्यक्त करने और साझा संपत्ति के उपयोग पर चर्चा करने का पूरा अधिकार है। परंतु किसी शांतिपूर्ण धार्मिक परंपरा को बिना पर्य...

