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White line controversy • नफ़रत की राजनीति नहीं, कानून का शासन चाहिए | Peace Letter by Nikhil Pattani | Shanti Sankalp Org

नफ़रत की राजनीति नहीं, कानून का शासन चाहिए प्रिय देशवासियों, हाल के White Line विवाद ने एक गंभीर प्रश्न हमारे सामने खड़ा किया है—क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी धार्मिक समुदाय को अपमानजनक और भड़काऊ शब्दों से संबोधित करना स्वीकार किया जा सकता है? हमारा उत्तर स्पष्ट है—नहीं। लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, आलोचना का अधिकार है और प्रश्न पूछने का अधिकार है। लेकिन किसी पूरे समुदाय को “Jain Jihad” जैसे शब्दों से जोड़ना केवल आलोचना नहीं, बल्कि ऐसा विमर्श है जो सामाजिक सौहार्द को गहरी क्षति पहुँचा सकता है। शब्दों की भी जिम्मेदारी होती है, क्योंकि वे समाज को जोड़ भी सकते हैं और बाँट भी सकते हैं। भारत का संविधान हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, पर साथ ही बंधुत्व, समानता और सभी नागरिकों की गरिमा की रक्षा का भी संदेश देता है। किसी भी प्रकार की ऐसी बयानबाज़ी जो समुदायों के बीच अविश्वास, वैमनस्य या तनाव को बढ़ावा दे, लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना के विपरीत है। यदि नागरिकों को यह प्रतीत होता है कि प्रसाद वेद पाठक के सार्वजनिक वक्तव्यों या सामग्री ने सामाजिक वैमनस्य, घृणा या धार्मि...

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